लॉन्ग टर्म व शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट - सीए रघुवीर पूनिया


आयकर अधिनियम की धारा 2(42A) व (42B) में शार्ट टर्म कैपिटल  एसेट व लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट की परिभाषा दी है।

1. शेयर्स, म्यूच्यूअल फण्ड आदि 12 महीने पुराने लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट बाकी शार्ट टर्म।
2. अचल संपत्ति, भूमि, भवन, कृषि भूमि आदि 24 महीने पुराने लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट बाकी शार्ट टर्म
3. अन्य कोई सम्पति 36 माह पुरानी तो लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट अन्यथा शार्ट टर्म

नोट:- अगर कोई प्रॉपर्टी बेचने वाले को विरासत में, बटवारे में, उत्तराधिकार में या गिफ्ट में मिली हो तो पुराने वाले मालिक का होल्डिंग पीरियड भी होल्डिंग की अवधि में गिना जाएगा।

शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन की गणना एवं टैक्स

बेचने पर प्राप्त होने वाली राशि में से बेचने पर होने वाले खर्चे ( ब्रोकरेज आदि) घटाने के बाद उस एसेट की लागत और उस पर और कोई खर्चा ( अर्थात इम्प्रोवमेंट कॉस्ट हो तो )हुआ है वो घटाने के बाद बची हुई राशि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होगी।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन करदाता की इनकम में जुड़ जाएगा, नॉर्मल स्लैब की रेट से टैक्स लग जाएगा  5, 20 या 30 प्रतिशत। लेकिन शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन अगर शेयर्स को बेचने से हुआ है तथा stt भी पे हुआ है तो टैक्स की स्पेशल रेट धारा 111ए के अनुसार  15% लगेगी। और कोई छूट नहीं मिलेगी।

नोट:- अगर किसी प्रॉपर्टी की बिक्री की राशि डीएलसी से कम है तो धारा 50C के अनुसार, डीएलसी ली जाएगी। जिसकी डिटेल में चर्चा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की गणना के समय करेंगे।

- सीए रघुवीर पूनिया, 9314507298
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