दिल्ली से उड़ेंगे जयपुर के नन्हे सपने




फ्लाइट ऑफ फेंटेसी के तहत बच्चों को दिल्ली की सैर, टे्रन का मजा और हवाई जहाज से मिलेगा आसमान छूने का जज्बा


जयपुर। हर साल की तरह इस बार भी जयपुर के नन्हें सपनों को उड़ान मिलेगी। शहर के यंग इंडियंस और राउंड टेबल इंडिया के तत्वावधान में मुख्यधारा से पिछड़े 45 बच्चों को दिल्ली की सैर करवाई जाएगी। यह बच्चे टे्रन का मजा लेते हुए पहले दिल्ली पहुंचेंगे फिर दिल्ली की सैर करके हवाई जहाज के जरिए जयपुर वापसी करेंगे। इस बहुचर्चित फ्लाइट ऑफ फेंटेसी प्रोग्राम में राउंड टेबल इंडिया के साथ यंग इंडियंस इस बार फिर रोमांच सफर पर निकलने की तैयारी में हैं।

इन बच्चों के रोमांचक सफर के बारे में बताते हुए यंग इंडियंस के चेयरमेन श्रेयांस कासलीवाल का कहना है कि जयपुर शहर भामाशाहों और दानदाओं का शहर है। इसे हम बड़े दिलवालों का शहर भी कहते हैं। नोबल कॉज के लिए शहर में सहयोग करने वाले दानदाताओं की वजह से हम उन बच्चों के सपनों को उड़ाने भरने में मदद कर पा रहे हैं, जिनके लिए टे्रन और हवाईजहाज में बैठना किसी बड़े सपने के सच होने जैसा है। इन 45 बच्चों को सैर के लिए जिस फंड की हमें जरूरत थी, जयपुर के बड़े दिलवाले सभी दानदाताओं ने महज 45 मिनट में बंदोबस्त कर दिया। हम यंग इंडियंस के तत्वावधान में ऐसे ऐसे ही प्रोजेक्ट्स के जरिए विभिन्न गतिविधियों का सतत आयोजन करते हैं। यूथ एम्पावरमेंट, वोटर अवेयरनेस सरीखे प्रोजेक्ट्स के साथ हॉर्न नॉट ओके के लॉन्गटर्म प्रोजेक्ट मसून में भी हम बहुत कुछ कर पाए हैं। इसमें करीब 15000 बच्चों को स्वच्छता और बालदुराचार संबंधी मामलों में हम मजबूत जागरुकता से जोड़ पाने में कामयाब रहे हैं। पिछड़ों को मुख्यधारा से जोडऩे वाले इस सफर को लेकर उत्साहित राउंड टेबल इंडिया के चेयरमेन जयपुर रजत बोहरा कहते हैं, यह सफर ख्वाहिशों और उम्मीदों को पंख देने का सफर है। इन बच्चों की जिंदगी में हम समाज के साथ मिलकर कुछ रंग भरने में कामयाब होते हैं, तो यह संवेदनाओं के साथ समाज को दो कदम और आगे ले जाने जैसा है। हमारी टीम उत्साहित है कि हम नन्हें सपनों में जान डालने के लिए एक बार फिर निकलने वाले हैं। 

समग्र विकास में जुटा यंग इंडियंस

कॉन्फिडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) का अहम हिस्सा यंग इंडियंस देश में युवा एंटरप्रेन्योर्स के साथ मिलकर काम करता है। देश के समग्र विकास में योगदान दे रहे एंटरप्रेन्योर्स इसको आगे बढ़ाते हैं। देशभर में यंग इंडियंस के 42 चैप्टर हैं, जिनमें करीब 3000 प्रत्यक्ष तौर पर सदस्य हैं। साथ ही जयपुर चैप्टर में इसके 175 सदस्य हैं, जो सामाजिक भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए व्यापार और वाणिज्य जगत में खास मुकाम बनाए हुए हैं। यंग इंडियंस देश की तरक्की में योगदान दे रहे युवा एंटरप्रेन्योर्स की एक ऐसी खोज है, जिसने समाज में युवा, मुख्यधारा से पिछड़े वर्ग और जरूरतमंदों को नई उड़ान देने का अहम जिम्मा ले रखा है।


राउंड टेबल का अहम योगदान
राउंड टेबल इंटरनेशनल संस्थान की स्थापना 1962 में की गई थी। इसके संस्थापकों में 18-40 वर्ष के ऐसे यंग अचीवर्स शामिल थे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कायम करते हुए सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता दी। विश्व के कई देशों के साथ भारत में भी राउंड टेबल इंडिया के अंतर्गत संगठन बेहद सफल रहा। विश्वभर में राउंड टेबल से 67 देशों के 65000 सदस्य जुड़े हैं और सेवाएं दे रहे हैं। 

भारत में राउंड टेबल इंडिया के अंतर्गत बीते 15 सालों में 2371 स्कूलों और 5736 कक्षाओं का निर्माण करवाया गया। करीब 212 करोड़ रुपए की लागत की इन परियोजनाओं से देश के शिक्षा जगत में आधार स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिससे सीधे तौर पर 51.50 लाख सुविधाओं से वंचित छात्र-छात्राओं को लाभ मिला। वर्ष 1998 में राउंट टेबल इंडिया ने राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर फ्रीडम थ्रू एजुकेशन का बीड़ा उठाया और समाज पर गहरा असर छोड़ा। स्कूल, टॉयलेट बनवाने, पेयजल सुविधाएं विकसित करने, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशालाएं इत्यादि स्थापित करने के अलावा राउंड टेबल मुख्यधारा से पिछड़े लोगों के लिए प्रयासरत है। फिलहाल देश में अपने 280 चैपटर के करीब 4000 सदस्यों के लिए राउंड टेबल 105 शहरों और कस्बों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सामाजिक रूप से पिछड़ों के लिए जीवनदायिनी संस्था बनकर उभर रही है। राउंड टेबल इंडिया और बुक ए स्माइल गत आठ वर्षों से सामाजिक सहभागिता कार्यक्रमों को वृहद स्तर पर सफलतापूर्वक अमलीजामा पहना रहे हैं। वर्ष 1997 से अब तक राउंड टेबल इंडिया की ओर से 2371 स्कूलों में , 5736 क्लासरूम भी बनवाए गए हैं, जिससे सीधे तौर पर अब तक करीब 60 लाख स्कूली छात्र-छात्राओं को शिक्षा में सुविधा मिल पाई है।
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